P03 : Hunger ( भुखमरी )

बंगाल के 1768 -70 के अकाल का भयावह दृश्य

22 अक्टूबर 1764 को बक्सर की लड़ाई में पराजय के पश्चात 1765 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने  मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर किए। जिससे  ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल का दीवानी अधिकार, (सम्राट की ओर से करों को एकत्र करने का अधिकार ) दिया गया था बदले में, मुगल बादशाह सालाना 26 लाख रुपये की राशि के पेंशन का अधिकारी बना । अंग्रेजों ने बंगाल की जनता को बुरी तरह से लूटा और स्पंज की तरह से यहां की समृद्धि को चूस चूस कर  ब्रिटैन में जाकर बहाया | जो बाद में ब्रिटिश औद्योगिक क्रांति में पूंजी की उपलब्धता का एक प्रमुख कारण बना |  

1768 -70 तक का बंगाल का अकाल, विश्व युद्ध  के  पहले तक का सबसे बड़ा शासनिक नरसंहार था जिसे अंग्रेजों ने अपने पुरे होशो-हवास में होने दिया |  इसमें बंगाल प्रान्त के  लगभग करीब 1 करोड़ लोग (एक तिहाई जनसंख्या ) भूख के कारण मारे गए थे | स्थिति इतनी भयावह थी की मरने के बाद मृतकों को उठाने वाले भी नहीं बचे थे |  अधिकांश आबादी अपनी जान बचाने के लिए दूसरे जगह पे चले गए थे | जान बचाने के लिए लोग कुछ भी करने को तैयार थे | स्त्रियों की स्थिति तो और भी विकट थी | बहुत सरे लोग ठग , चोरी आदि नीच कर्म करने को बाध्य हुए , जो भारतीय समाज में बहुत कम ही दिखने को मिलता था |

आजादी  के बाद  भारत  के संविधान में भारत को एक कल्याणकारी राज्य बनाया गया | इसके तहत देश की सरकार ने , अकाल और भुखमरी की समस्या के समाधान के लिए अनेक कार्यक्रम चलाये | मॉनसून पे आधारित हमारी कृषि अक्सर वर्षाभाव में सूखाग्रस्त हो जाती है | वर्षाधारित क्षेत्रों में अभी भी सूखे के समय सरकार अनेक कार्यक्रम चलती है ताकि जान और माल की क्षति काम से काम किया जा सके |

क्षेत्रीय और आर्थिक असंतुलन  होने के कारण, अन्न की उपलब्धता होने पर भी बहुत सारे लोग इसे नहीं खरीद पा रहे थे, सरकार ने जन-वितरण की दुकानों पे कम मूल्य पे इसे आर्थिक  देकर उपलब्ध करा रही है | ये सारे उपाय इसी लिए किये गए हैं ताकि लोगो को भुखमरी की नौबत न झेलना पड़े और कोई भुखमरी का शिकार न हो |

आर्थिक सुधारों और शहरीकरण के पश्चात् , भारत की ग्रामीण परिवेश से युवा शहरों की  ओर अग्रसर होते जा रहे हैं , और छूटते जा रहे हैं उनके वृद्ध माता-पिता, जो उम्र के इस पड़ाव में खुद से भोजन भी बनाने में अक्षम हैं |  आज लगभग  सारे गांओं में कोई न कोई ऐसा परिवार है जिसमे केवल वृद्ध ही शेष हैं  और इस कारण  वो इस भुखमरी के शिकार हो रहे हैं | इस छिपी हुई भुखमरी पे सरकार को तुरंत ध्यान देने की जरुरत है, अगर मध्याह्न भोजन योजना (MDM Scheme) में इन वृद्धो को भी शामिल कर लिया जाये तो शायद ये एक सही कदम हो |

“अम्मा कैंटीन” और “आम आदमी भोजनालय”  राजनितिक और सामाजिक दोनों तरह से भुखमरी के विरुद्ध एक सही प्रयास हो सकते हैं |  

Comments

Popular Posts